AI in Indian Army अब केवल एक भविष्य की कल्पना नहीं, बल्कि एक ठोस रणनीतिक दिशा बन चुका है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सेनाएं अपनी युद्धक तैयारियों को नए स्तर पर ले जाने की योजना पर तेजी से काम कर रही हैं। आने वाले समय की लड़ाई केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं, बल्कि डेटा, एल्गोरिद्म और स्मार्ट सिस्टम के जरिए लड़ी जाएगी।
राजधानी में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान सेना ने साफ संकेत दिया कि टेक्नोलॉजी अब सैन्य शक्ति का सबसे अहम आधार बनने जा रही है। ‘स्मार्टाइजिंग द किल चेन’ विषय पर आयोजित सेमिनार में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए। चर्चा का मुख्य उद्देश्य था कि कैसे AI in Indian Army के माध्यम से हथियारों, ड्रोन, सैन्य वाहनों और अन्य प्लेटफॉर्म्स को अधिक स्मार्ट और सटीक बनाया जा सकता है।
एआई से बदलेगी मेंटिनेंस और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था
AI in Indian Army का सबसे बड़ा प्रभाव प्रेडिक्टिव मेंटिनेंस (Predictive Maintenance) में देखने को मिलेगा। अब मशीनें पहले ही यह संकेत दे सकेंगी कि कौन सा सिस्टम कब खराब हो सकता है, किस हिस्से में दिक्कत आने वाली है और किन संसाधनों की पहले से जरूरत पड़ेगी।
इसका मतलब यह है कि मरम्मत की प्रक्रिया समस्या आने के बाद नहीं, बल्कि पहले से तैयारी के रूप में की जाएगी। इससे डाउनटाइम कम होगा और ऑपरेशनल टेंपो बरकरार रहेगा।
लॉजिस्टिक्स सिस्टम को भी एआई से पूरी तरह जोड़ा जा रहा है। कौन सा स्पेयर पार्ट कब खत्म होगा, किस फॉर्मेशन में कितनी आवश्यकता है और किस उपकरण को कब सर्विसिंग चाहिए—इन सभी बातों का पूर्वानुमान लगाया जाएगा। इससे सप्लाई चेन अधिक सक्रिय और मजबूत बनेगी।
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सेंसर और डेटा से बढ़ेगी ऑपरेशनल सटीकता
डीजी ईएमई लेफ्टिनेंट जनरल राजीव कुमार साहनी ने कहा कि उद्योग जगत के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर ऑपरेशनल सटीकता को और प्रभावी बनाने का बड़ा अवसर है। बड़ी मात्रा में सेंसर से प्राप्त डेटा को कार्रवाई योग्य जानकारी में बदला जा सकता है।
AI in Indian Army के तहत मौजूदा हथियार प्रणालियों और सैन्य प्लेटफॉर्म्स में सेंसर लगाए जा रहे हैं। इससे पुराने सिस्टम को आधुनिक, डेटा–सक्षम और स्मार्ट प्लेटफॉर्म में अपग्रेड किया जा सकेगा। बिना अधिक खर्च किए मौजूदा संसाधनों की क्षमता कई गुना बढ़ाई जा सकती है।
उन्नत एनालिटिक्स के जरिए इंजीनियरिंग सपोर्ट को भी तेज और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया और भी मजबूत होगी।
ड्रोन, रोबोटिक्स और मानव रहित सिस्टम में एआई का उपयोग
भविष्य के युद्धों में मानव रहित हवाई प्रणालियों (UAV), काउंटर–यूएएस सिस्टम और रोबोटिक प्लेटफॉर्म्स की भूमिका बेहद अहम होगी। AI in Indian Army के तहत इन सभी सिस्टम्स में एआई का एकीकरण किया जा रहा है।
ड्रोन और काउंटर–ड्रोन तकनीक में एआई का इस्तेमाल दुश्मन की गतिविधियों का तेजी से विश्लेषण करने और सटीक प्रतिक्रिया देने में मदद करेगा। रोबोटिक प्लेटफॉर्म्स को भी इस तरह विकसित किया जा रहा है कि वे जटिल परिस्थितियों में स्वतः निर्णय ले सकें।
यह स्पष्ट है कि भविष्य के युद्धों में मशीनों की भूमिका बढ़ेगी और जो सेना तकनीक में आगे होगी, वही निर्णायक बढ़त हासिल करेगी।
कमांड फैसलों में रियल–टाइम सपोर्ट
AI in Indian Army का एक और महत्वपूर्ण पहलू है कमांड स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज और सटीक बनाना। इंजीनियरिंग सपोर्ट को अब सीधे कमांड फैसलों से जोड़ा जाएगा।
कमांडर को रियल टाइम में यह जानकारी उपलब्ध होगी कि किस यूनिट के पास कौन सा उपकरण पूरी तरह तैयार है और कौन सा सिस्टम मेंटेनेंस में है। इससे रणनीतिक फैसले अधिक प्रभावी और त्वरित होंगे।
स्मार्ट वॉरफेयर की ओर बढ़ते कदम
यह पहल संकेत देती है कि सेना केवल हथियारों के आधुनिकीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘स्मार्ट वॉरफेयर सिस्टम’ की दिशा में आगे बढ़ रही है। स्वदेशी नवाचार, उद्योग और अकादमिक संस्थानों के साथ साझेदारी के जरिए AI in Indian Army को मजबूत आधार दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब युद्ध केवल मैदान में नहीं, बल्कि डेटा और एल्गोरिद्म के स्तर पर भी लड़ा जाएगा। इस दिशा में भारत तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, AI in Indian Army सैन्य रणनीति, लॉजिस्टिक्स, मेंटिनेंस और कमांड सिस्टम में व्यापक बदलाव ला रहा है। इससे न केवल हथियार अधिक सटीक और प्रभावी बनेंगे, बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित होगा।
भविष्य की जंग टेक्नोलॉजी आधारित होगी और भारतीय सेना उस चुनौती के लिए खुद को पूरी तरह तैयार कर रही है।

